बच्चों में कान दर्द (Earache) और कान से पानी/मवाद आना (Ear Discharge) : कारण, लक्षण, इलाज और बचाव –

बच्चों में कान दर्द (Earache) और कान से पानी या मवाद आना (Ear Discharge) एक आम स्वास्थ्य समस्या है। छोटे बच्चे अक्सर अपने कान में दर्द या परेशानी को ठीक से बता नहीं पाते। ऐसे में बार-बार कान छूना, रोना, चिड़चिड़ापन, नींद खराब होना या दूध पीने में परेशानी जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।

कान दर्द और कान से डिस्चार्ज कई कारणों से हो सकते हैं, जैसे कान का संक्रमण, सर्दी-जुकाम के बाद मध्य कान में संक्रमण, बाहरी कान का संक्रमण, कान में चोट, ईयरवैक्स या कभी-कभी कान के पर्दे में छेद। इसलिए लगातार कान दर्द या कान से मवाद आने पर बच्चे की चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

बच्चों में कान दर्द के सामान्य कारण :

1. मध्य कान का संक्रमण

बच्चों में कान दर्द का एक सामान्य कारण मध्य कान का संक्रमण (Otitis Media) है। यह अक्सर सर्दी-जुकाम या श्वसन संक्रमण के बाद हो सकता है।

इसमें बच्चे को कान में दर्द, बुखार, चिड़चिड़ापन और सुनने में अस्थायी कमी हो सकती है।

2. बाहरी कान का संक्रमण

कान की बाहरी नली में संक्रमण या सूजन होने पर कान में दर्द, खुजली, लालिमा और कभी-कभी डिस्चार्ज हो सकता है। कान को छूने या हिलाने पर दर्द बढ़ सकता है।

3. कान के पर्दे में छेद

कभी-कभी मध्य कान के संक्रमण के कारण कान के पर्दे पर दबाव बढ़ सकता है और पर्दे में छोटा छेद हो सकता है। इसके बाद कान से मवाद या तरल पदार्थ बाहर आ सकता है।

Note – कान में ईयरवैक्स जमा होना

अधिक मात्रा में कान का मैल जमा होने से कान बंद महसूस हो सकता है और सुनने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, केवल ईयरवैक्स को कान से मवाद आने का सामान्य कारण नहीं माना जाता।

Note- कान में कोई बाहरी वस्तु

छोटे बच्चे कभी-कभी खिलौने का छोटा हिस्सा या अन्य वस्तु कान में डाल सकते हैं। इससे कान में चोट, दर्द, संक्रमण या डिस्चार्ज हो सकता है।

बच्चों में कान दर्द के लक्षण :

बच्चे में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • कान में दर्द
  • बार-बार कान पकड़ना या रगड़ना
  • तेज रोना या चिड़चिड़ापन
  • बुखार
  • रात में नींद खराब होना
  • सुनने में कमी
  • कान बंद या भारी महसूस होना
  • सिरदर्द
  • छोटे बच्चों में दूध पीने में परेशानी
  • कभी-कभी चक्कर या संतुलन बिगड़ना

छोटे बच्चे अपनी समस्या बता नहीं पाते, इसलिए उनके व्यवहार में अचानक बदलाव भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।

कान से पानी या मवाद आने के लक्षण

कान से निकलने वाला पदार्थ पानी जैसा, सफेद, पीला, गाढ़ा या कभी-कभी खून मिला हुआ हो सकता है। इसके साथ निम्न लक्षण भी हो सकते हैं:

  • कान से लगातार पानी या मवाद आना
  • कान में दर्द
  • कान में खुजली
  • सुनने में कमी
  • कान में भारीपन
  • कान के आसपास लालिमा या सूजन
  • बुखार
  • बच्चे का चिड़चिड़ा होना

कान से मवाद या लगातार डिस्चार्ज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बच्चों में कान दर्द का इलाज

कान दर्द का उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है। डॉक्टर बच्चे के कान की जांच करके तय करते हैं कि संक्रमण किस हिस्से में है और किस प्रकार के उपचार की जरूरत है।

दर्द और बुखार के लिए

बच्चों में दर्द या बुखार के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल जैसी दवा दी जा सकती है। इसकी मात्रा बच्चे के वजन और उम्र के अनुसार निर्धारित की जाती है।

बिना सलाह के बच्चे को वयस्कों की दवाएं या गलत मात्रा में दवा नहीं देनी चाहिए।

एंटीबायोटिक

हर कान के संक्रमण में एंटीबायोटिक आवश्यक नहीं होती। कुछ हल्के संक्रमण अपने आप ठीक हो सकते हैं, जबकि गंभीर संक्रमण या विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर एंटीबायोटिक लिख सकते हैं।

यदि डॉक्टर ने एंटीबायोटिक दी है, तो उसे निर्धारित मात्रा और अवधि के अनुसार ही दें। बची हुई पुरानी एंटीबायोटिक अपने आप शुरू न करें।

कान से डिस्चार्ज होने पर

यदि कान से मवाद या पानी आ रहा है, तो बच्चे के कान को साफ और सूखा रखने की कोशिश करें। केवल कान के बाहरी हिस्से को मुलायम कपड़े से साफ किया जा सकता है।

कान के अंदर कॉटन बड, माचिस की तीली, पिन या कोई अन्य वस्तु न डालें।

बिना डॉक्टर की सलाह के कान में तेल, घरेलू नुस्खे या ईयर ड्रॉप्स डालने से बचें, खासकर तब जब कान के पर्दे में छेद होने की संभावना हो।

कौन-से घरेलू उपाय नहीं करने चाहिए?

कई माता-पिता कान दर्द में घरेलू उपचार करते हैं, लेकिन कुछ उपाय नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इनसे बचें:

  • कान में सरसों या कोई अन्य तेल डालना
  • कान के अंदर कॉटन बड डालना
  • मवाद निकालने के लिए कान को दबाना
  • बिना सलाह के एंटीबायोटिक ड्रॉप्स डालना
  • पुराने प्रिस्क्रिप्शन की दवा दोबारा देना
  • कान में कोई नुकीली वस्तु डालना

डॉक्टर से कब तुरंत संपर्क करें?

यदि बच्चे में निम्न में से कोई लक्षण हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है:

  • बहुत तेज या लगातार कान दर्द
  • कान से मवाद या खून आना
  • तेज बुखार
  • सुनने में स्पष्ट कमी
  • कान के पीछे सूजन या तेज दर्द
  • चक्कर या संतुलन बिगड़ना
  • तेज सिरदर्द
  • बार-बार उल्टी
  • बच्चा बहुत सुस्त दिखाई देना
  • चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी
  • कान से लंबे समय तक या बार-बार डिस्चार्ज होना

कान के पीछे दर्द और सूजन गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकते हैं और ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

कान दर्द और कान से डिस्चार्ज से बचाव

बच्चों में कान की समस्याओं का जोखिम कम करने के लिए:

  1. बच्चे के हाथ नियमित रूप से साफ करवाएं।
  2. बच्चे को धूम्रपान के धुएं से दूर रखें।
  3. उम्र के अनुसार सभी जरूरी टीकाकरण करवाएं।
  4. कान के अंदर कोई वस्तु न डालें।
  5. सर्दी-जुकाम के दौरान बच्चे की उचित देखभाल करें।
  6. कान से पानी या मवाद आने पर डॉक्टर से सलाह लें।
  7. बार-बार कान का संक्रमण होने पर ENT विशेषज्ञ से जांच करवाएं।
  8. सुनने में कमी महसूस होने पर hearing test की आवश्यकता के बारे में डॉक्टर से पूछें।

इलाज के बाद परिणाम (Result)

अधिकांश सामान्य कान संक्रमण उचित देखभाल और समय पर उपचार से ठीक हो जाते हैं। हालांकि, बार-बार होने वाला संक्रमण या लंबे समय तक कान से मवाद आना अधिक गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।

यदि बच्चे को बार-बार कान का संक्रमण होता है या कान से लंबे समय तक डिस्चार्ज आता है, तो सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए समय पर जांच और उचित उपचार महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष :

बच्चों में कान दर्द और कान से पानी या मवाद आना सामान्य समस्या हो सकती है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसका कारण संक्रमण, कान के पर्दे की समस्या, बाहरी कान की सूजन या अन्य कारण हो सकता है।

माता-पिता को बच्चे के कान में तेल, कॉटन बड या कोई घरेलू पदार्थ डालने से बचना चाहिए। लगातार दर्द, मवाद, बुखार या सुनने में कमी होने पर बाल रोग विशेषज्ञ या ENT विशेषज्ञ से जांच करवाना बेहतर है। समय पर पहचान और उचित उपचार से कई कान संबंधी जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

मेडिकल डिस्क्लेमर :

यह ब्लॉग केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और शैक्षणिक जानकारी के लिए है। यह किसी बच्चे की व्यक्तिगत चिकित्सा जांच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। बच्चों में दवा, एंटीबायोटिक या ईयर ड्रॉप की मात्रा और अवधि डॉक्टर द्वारा बच्चे की उम्र, वजन और बीमारी के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए। कान से लगातार मवाद/पानी आना, तेज दर्द, बुखार, सुनने में कमी या कान के पीछे सूजन होने पर योग्य चिकित्सक या ENT विशेषज्ञ से संपर्क करें।

“The post was created by Dr.Sailendra Kumar (Medical officer under the RBSK programme in India) .“

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