“आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में तनाव, चिंता, नींद की समस्या, मानसिक थकान और एकाग्रता की कमी जैसी परेशानियाँ आम होती जा रही हैं। ऐसे समय में योग और प्राणायाम शरीर के साथ-साथ मन को शांत करने के लिए उपयोगी सहायक अभ्यास हो सकते हैं।
भ्रामरी प्राणायाम योग की एक सरल श्वसन विधि है, जिसमें सांस बाहर छोड़ते समय मधुमक्खी के समान धीमी “म्…म्…” ध्वनि उत्पन्न की जाती है। इस अभ्यास को विशेष रूप से मन को शांत करने और शरीर में विश्राम की भावना उत्पन्न करने के लिए जाना जाता है।”
हालाँकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि भ्रामरी प्राणायाम किसी बीमारी का निश्चित उपचार नहीं है। आधुनिक वैज्ञानिक शोध में इसके कुछ संभावित लाभों के संकेत मिले हैं, लेकिन इसके सभी दावों की पुष्टि अभी पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययनों से नहीं हुई है।
आइए भ्रामरी प्राणायाम की सही विधि, संभावित स्वास्थ्य लाभ, वैज्ञानिक शोध और आवश्यक सावधानियों को सरल भाषा में समझते हैं।
1. भ्रामरी प्राणायाम क्या है?
भ्रामरी प्राणायाम योग की एक श्वसन क्रिया है। इसमें व्यक्ति आरामदायक अवस्था में बैठकर धीरे-धीरे सांस अंदर लेता है और सांस बाहर छोड़ते समय मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट की आवाज निकालता है।
सामान्यतः सांस छोड़ते समय:
“म्…म्…म्…”
जैसी धीमी और सहज ध्वनि बनाई जाती है।
“भ्रामरी” शब्द भ्रमर से जुड़ा है। भ्रमर का अर्थ भौंरा या मधुमक्खी के समान भनभनाने वाला कीट माना जाता है। इसी कारण इस प्राणायाम में उत्पन्न होने वाली गुनगुनाहट जैसी ध्वनि के कारण इसे भ्रामरी कहा जाता है।
योग की पारंपरिक पद्धति में इसे मन को शांत करने, ध्यान लगाने और मानसिक विश्राम के लिए उपयोगी माना जाता हयोग की पारंपरिक पद्धति में इसे मन को शांत करने, ध्यान लगाने और मानसिक विश्राम के लिए उपयोगी माना जाता है।
2. भ्रामरी प्राणायाम करने की सही विधि –
भ्रामरी प्राणायाम करना सामान्यतः सरल है। शुरुआत हमेशा आराम से और बिना किसी दबाव के करनी चाहिए।
चरण 1: आरामदायक स्थिति में बैठें
किसी शांत और साफ जगह पर बैठें।
आप:
- सुखासन में,
- पद्मासन में यदि आरामदायक हो,
- या कुर्सी पर सीधे बैठकर
इसका अभ्यास कर सकते हैं।
रीढ़ की हड्डी को सहज रूप से सीधा रखें। शरीर में अनावश्यक तनाव न रखें।
चरण 2: आंखें बंद करें
आंखें धीरे से बंद करें।
कुछ क्षण सामान्य रूप से सांस लें और शरीर को ढीला छोड़ें।
चरण 3: धीरे-धीरे सांस अंदर लें
नाक से धीरे और आराम से सांस अंदर लें।
सांस को बहुत ज्यादा गहरा या जोर लगाकर लेने की आवश्यकता नहीं है।
चरण 4: सांस बाहर छोड़ते समय गुनगुनाहट करें
अब मुंह बंद रखते हुए धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें।
सांस छोड़ते समय:
“म्…म्…म्…”
जैसी मधुर और लगातार गुनगुनाहट की आवाज निकालें।
ध्वनि को बहुत तेज करने की आवश्यकता नहीं है।
चरण 5: कंपन को महसूस करें
गुनगुनाहट करते समय चेहरे, नाक या सिर के आसपास हल्का कंपन महसूस हो सकता है।
इस कंपन को केवल महसूस करें। इसे जबरदस्ती पैदा करने की कोशिश न करें।
चरण 6: अगली पुनरावृत्ति करें
एक बार सांस पूरी तरह सहज रूप से बाहर निकालने के बाद सामान्य सांस लें और फिर अगली बार यही प्रक्रिया दोहराएँ।
शुरुआती व्यक्ति को सांस रोकने की आवश्यकता नहीं है।

4. शुरुआती लोगों के लिए कितनी देर और कितनी बार करें?
यदि आपने पहले कभी भ्रामरी प्राणायाम नहीं किया है, तो बहुत कम समय से शुरुआत करना बेहतर है।
शुरुआत में
लगभग 5 बार भ्रामरी करने से शुरुआत की जा सकती है।
यदि अभ्यास सहज लगे तो धीरे-धीरे इसे:
5 से 10 बार
तक किया जा सकता है।
एक अभ्यास सत्र लगभग 5 से 10 मिनट का रखा जा सकता है।
यह कोई निश्चित चिकित्सकीय मात्रा नहीं है। अलग-अलग शोधों में श्वसन अभ्यास की अवधि और संख्या अलग-अलग रही है।
इसे कब करें?
भ्रामरी प्राणायाम के लिए कोई एक अनिवार्य समय नहीं है।
इसे सुविधानुसार किया जा सकता है:
- सुबह शांत वातावरण में
- शाम को काम के बाद
- ध्यान से पहले
- सोने से पहले
- मानसिक तनाव के समय विश्राम के लिए
यदि रात में करने पर आपको मानसिक शांति महसूस होती है, तो इसे सोने से पहले अपनी विश्राम दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
5. भ्रामरी प्राणायाम के संभावित स्वास्थ्य लाभ
तनाव कम करने में सहायता
तनाव के समय मन में लगातार विचार चलते रहते हैं और शरीर में बेचैनी महसूस हो सकती है।
भ्रामरी के दौरान व्यक्ति अपना ध्यान सांस और गुनगुनाहट की ध्वनि पर केंद्रित करता है। इससे कुछ लोगों को मानसिक विश्राम का अनुभव हो सकता है।
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में भ्रामरी के बाद शरीर की विश्राम संबंधी प्रतिक्रियाओं में बदलाव देखे गए हैं।
हालांकि, इसे तनाव या किसी मानसिक बीमारी का निश्चित उपचार नहीं कहा जा सकता।
चिंता में संभावित सहायता
चिंता के दौरान व्यक्ति बेचैनी, तेज धड़कन, घबराहट और तेज सांस लेने जैसी समस्याएँ महसूस कर सकता है।
धीमी और नियंत्रित श्वसन कुछ लोगों को शांत महसूस करने में सहायता कर सकती है।
इसलिए भ्रामरी को चिंता कम करने वाली सहायक विश्राम विधि के रूप में अपनाया जा सकता है।
लेकिन यदि किसी व्यक्ति को लगातार या गंभीर चिंता की समस्या है, तो केवल भ्रामरी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
नींद में संभावित लाभ
रात में सोने से पहले मन में दिनभर की घटनाओं और चिंताओं के विचार चलते रह सकते हैं।
ऐसी स्थिति में धीमी श्वसन और गुनगुनाहट पर ध्यान देने से कुछ लोगों को मन शांत करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन यह कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा कि भ्रामरी अनिद्रा का इलाज करती है।
इसे सोने से पहले मानसिक विश्राम की सहायक विधि के रूप में देखा जा सकता है।
एकाग्रता में सहायता
भ्रामरी करते समय व्यक्ति अपना ध्यान:
- सांस,
- ध्वनि,
- और शरीर में महसूस होने वाले हल्के कंपन
पर रखता है।
इस कारण कुछ लोगों को कुछ समय के लिए मानसिक एकाग्रता और ध्यान में सहायता मिल सकती है।
लेकिन लंबे समय तक स्मरण शक्ति या एकाग्रता बढ़ाने के लिए भ्रामरी के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं हैं।
रक्तचाप के संदर्भ में
रक्तचाप के विषय में विशेष सावधानी आवश्यक है।
कुछ अध्ययनों में भ्रामरी और अन्य श्वसन अभ्यासों के बाद हृदय गति तथा रक्तचाप में परिवर्तन देखा गया है।
व्यापक श्वसन अभ्यासों पर किए गए अध्ययनों में रक्तचाप में कुछ कमी के संकेत मिले हैं। लेकिन इन अध्ययनों में केवल भ्रामरी प्राणायाम ही शामिल नहीं था, बल्कि कई प्रकार के श्वसन अभ्यास शामिल थे।
इसलिए इन परिणामों को सीधे केवल भ्रामरी प्राणायाम का प्रभाव कहना उचित नहीं होगा।
उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति भ्रामरी को जीवनशैली में एक सहायक अभ्यास के रूप में अपना सकते हैं, लेकिन डॉक्टर द्वारा दी गई रक्तचाप की दवाओं को अपने-आप बंद या कम नहीं करना चाहिए।
6. वैज्ञानिक शोध क्या कहता है?
भ्रामरी प्राणायाम पर वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध हैं, लेकिन इनकी संख्या अभी सीमित है।
एक व्यवस्थित वैज्ञानिक समीक्षा में भ्रामरी से संबंधित उपलब्ध अध्ययनों का मूल्यांकन किया गया था। इसमें कुछ अध्ययनों में हृदय गति, रक्तचाप और स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली से संबंधित परिवर्तन देखे गए।
लेकिन शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि उपलब्ध अध्ययनों की गुणवत्ता सीमित थी और अध्ययन पद्धतियों में अंतर था।
इसका अर्थ है कि परिणाम उत्साहजनक हो सकते हैं, लेकिन अभी उनसे बहुत मजबूत निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
8. सामान्य गलतियाँ और सावधानिया
भ्रामरी सरल अभ्यास है, फिर भी कुछ सामान्य गलतियों से बचना चाहिए।
बहुत तेज आवाज निकालना
गुनगुनाहट बहुत तेज करने की आवश्यकता नहीं है।
ध्वनि आरामदायक और मधुर होनी चाहिए।
बहुत जोर से सांस लेना
बहुत गहरी या तेजी से सांस लेने से कुछ लोगों को चक्कर या असहजता हो सकती है।
सांस प्राकृतिक और सहज रखें।
सांस को जबरदस्ती रोकना
शुरुआती लोगों को सांस रोकने की आवश्यकता नहीं है।
आराम से सांस लें और आराम से बाहर छोड़ें।
कानों पर बहुत अधिक दबाव डालना
कुछ लोग भ्रामरी के दौरान कानों को उंगलियों से बंद करते हैं।
यदि ऐसा करें तो कानों पर अत्यधिक दबाव न डालें।
असुविधा के बावजूद अभ्यास करते रहना
यदि आपको:
- चक्कर,
- सांस लेने में कठिनाई,
- सीने में दर्द,
- अत्यधिक बेचैनी,
- या कोई अन्य असामान्य लक्षण
महसूस हो तो तुरंत अभ्यास रोक दें और सामान्य सांस लें।
9. किन लोगों को डॉक्टर या प्रशिक्षित योग शिक्षक की सलाह लेनी चाहिए?
जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें नियमित रूप से कोई नया श्वसन अभ्यास शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।
विशेष सावधानी इन स्थितियों में आवश्यक हो सकती है:
- बहुत अधिक या अनियंत्रित रक्तचाप
- गंभीर हृदय रोग
- गंभीर श्वसन रोग
- बार-बार चक्कर आना
- बेहोशी की समस्या
- कान से संबंधित गंभीर समस्या
- हाल में हुई शल्य चिकित्सा
- गर्भावस्था में कोई चिकित्सकीय जटिलता
यह सूची पूरी नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सलाह अलग हो सकती है।
यदि अभ्यास के दौरान सीने में दर्द, गंभीर सांस फूलना, बेहोशी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो अभ्यास रोककर चिकित्सकीय सहायता लें।
10. भ्रामरी प्राणायाम और पारंपरिक योग मान्यताएँ
पारंपरिक योग में भ्रामरी को मन को शांत करने, ध्यान में सहायता करने और आंतरिक शांति के लिए उपयोगी माना जाता है।
ये पारंपरिक योग संबंधी मान्यताएँ हैं।
दूसरी ओर, आधुनिक वैज्ञानिक शोध मुख्य रूप से शरीर की श्वसन गति, हृदय गति, रक्तचाप और स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली जैसे मापने योग्य परिणामों का अध्ययन करता है।
इसलिए दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पारंपरिक योग में किसी अभ्यास को उपयोगी माना जाना और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में उसके किसी विशेष रोग पर प्रभाव सिद्ध होना एक ही बात नहीं है।
इसी कारण भ्रामरी को स्वास्थ्य और विश्राम की सहायक विधि के रूप में अपनाना अधिक उचित है।
11. अंतिम निष्कर्ष
भ्रामरी प्राणायाम एक सरल, कम खर्च वाली और सामान्यतः सहज श्वसन विधि है, जिसमें सांस बाहर छोड़ते समय मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट की ध्वनि उत्पन्न की जाती है।
पारंपरिक योग में इसे मानसिक शांति और ध्यान के लिए उपयोगी माना जाता है। आधुनिक शोध भी संकेत देता है कि नियंत्रित श्वसन और विभिन्न प्राणायाम शरीर की विश्राम प्रतिक्रिया, हृदय गति और संभवतः रक्तचाप पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
लेकिन भ्रामरी प्राणायाम पर विशेष रूप से उपलब्ध वैज्ञानिक शोध अभी सीमित है। इसलिए इसके प्रत्येक स्वास्थ्य लाभ को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपचार बताना उचित नहीं होगा।
इसे तनाव प्रबंधन, मानसिक विश्राम और स्वस्थ जीवनशैली के एक सहायक अभ्यास के रूप में देखा जा सकता है।
यह किसी बीमारी की गारंटी वाली दवा नहीं है और न ही डॉक्टर द्वारा दिए गए उपचार का विकल्प है।
आसान शब्दों में भ्रामरी प्राणायाम कैसे याद रखें?
बैठें → आंखें बंद करें → धीरे सांस लें → धीरे सांस छोड़ें → “म्…म्…” की गुनगुनाहट करें → आराम महसूस करें → दोहराएं।
शुरुआती अभ्यास
5 बार से शुरुआत करें।
आरामदायक लगे तो धीरे-धीरे 5–10 बार तक अभ्यास किया जा सकता है।
सांस को जबरदस्ती न रोकें और अपनी क्षमता से अधिक अभ्यास न करें।
सबसे जरूरी बातें
✔ सही और आरामदायक तरीके से करें।
✔ नियमित अभ्यास रखें।
✔ सांस को सहज रखें।
✔ बहुत तेज आवाज न निकालें।
✔ चक्कर या असुविधा होने पर रुक जाएं।
✔ बीमारी होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
✔ निर्धारित दवाओं को अपने-आप बंद न करें।
चिकित्सकीय अस्वीकरण
यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य शिक्षा और जानकारी के उद्देश्य से है। यह व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह, रोग का निदान या उपचार नहीं है। यदि आपको उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, श्वसन संबंधी बीमारी, चिंता संबंधी समस्या या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो नियमित प्राणायाम शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से सलाह लें। भ्रामरी प्राणायाम को चिकित्सकीय उपचार के स्थान पर नहीं, बल्कि आवश्यकता के अनुसार उसके सहायक अभ्यास के रूप में ही देखें।
सुरक्षित तरीके से, अपनी क्षमता के अनुसार और नियमित रूप से किया गया अभ्यास ही सबसे महत्वपूर्ण है।
The post created Dr.Sailendra kumar( medical officer under the RBSK programme in India )
thank you …
